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Showing posts from July, 2023

*कर्मो से बनते हैं भाग्य*

  *कर्मो से बनते हैं भाग्य*  *प्रकृत्य ऋषि का रोज का नियम था कि वह नगर से दूर जंगलों में स्थित शिव मंदिर में भगवान् शिव की पूजा में लींन रहते थे। कई वर्षो से यह उनका अखंड नियम था।* *उसी जंगल में एक नास्तिक डाकू अस्थिमाल का भी डेरा था। अस्थिमाल का भय आसपास के क्षेत्र में व्याप्त था। अस्थिमाल बड़ा नास्तिक था। वह मंदिरों में भी चोरी-डाका से नहीं चूकता था।* *एक दिन अस्थिमाल की नजर प्रकृत्य ऋषि पर पड़ी। उसने सोचा यह ऋषि जंगल में छुपे मंदिर में पूजा करता है, हो न हो इसने मंदिर में काफी माल छुपाकर रखा होगा। आज इसे ही लूटते हैं।* *अस्थिमाल ने प्रकृत्य ऋषि से कहा कि जितना भी धन छुपाकर रखा हो चुपचाप मेरे हवाले कर दो। ऋषि उसे देखकर तनिक भी विचलित हुए बिना बोले- कैसा धन ? मैं तो यहाँ बिना किसी लोभ के पूजा को चला आता हूं।* *डाकू को उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ। उसने क्रोध में ऋषि प्रकृत्य को जोर से धक्का मारा। ऋषि ठोकर खाकर शिवलिंग के पास जाकर गिरे और उनका सिर फट गया। रक्त की धारा फूट पड़ी।* *इसी बीच आश्चर्य ये हुआ कि ऋषि प्रकृत्य के गिरने के फलस्वरूप शिवालय की छत से सोने की कुछ मोहरें ...

Motivational Story In Hindi

Motivational Story In Hindi    EK Divyang Raja Ki Kahani  यह कहानी एक ऐसे  दिव्यांग राजा की है जिसके राज्य में कोई भी समस्या नहीं थी। राज्य के सभी उस राजा से बहुत खुश थे और ईश्वर का धन्यवाद करते थे कि इतने अच्छे राजा को उनकी ज़िन्दगी  में भेजा है। वह राजा दिव्यांग था उसकी एक आँख नहीं थी और एक पैर नहीं था लेकिन फिर भी राजा को इस बात का कोई दुःख नहीं था। एक दिन राजा अपने महल के गलियारे में घूमते हुए अपने पूर्वजो की लगी तस्वीर को देख रहा था और सोच रहा था की मेरे पिताजी इतने शूरवीर थे, उनके पिताजी इतने शूरवीर थे। हमें इतने शूरवीर खानदान में जन्म लेने का मौका मिला यह ऊपर वाले का धन्यवाद है। राजा ने सभी चित्र को देखते हुए आखरी चित्र तक पंहुचा और फिर उस खाली जगह को देखा तो वह चिंता में पड़ गया क्योकि उसे मालूम था की अब यहाँ जो तस्वीर लगेगी वह उसी की लगेगी। लेकिन राजा को इस बात की चिंता नहीं थी की वह मर जायेगा, चिंता इस बात की थी की वहा जो Painting लगेगी वो कैसी लगेगी। राजा का एक आँख और एक पैर ना होने की वजह से वह चिंता में पड़ गया और सोचने लगा की इस गलियारे में इतने ...

🌿 *!! मुठ्ठी भर मेंढ़क !!* 🌿

*!! मुठ्ठी भर मेंढ़क !!*  *बहुत समय पहले की बात है, किसी गाँव में मोहन नाम का एक किसान रहता था। वह बड़ा मेहनती और ईमानदार था. अपने अच्छे व्यवहार के कारण दूर-दूर तक लोग उसे जानते थे और उसकी प्रशंशा करते थे। पर एक दिन जब देर शाम वह खेतों से काम कर लौट रहा था तभी रास्ते में उसने कुछ लोगों को बाते करते सुना, वे उसी के बारे में बात कर रहे थे।* *मोहन अपनी प्रशंशा सुनने के लिए उन्हें बिना बताये धीरे-धीरे उनके पीछे चलने लगा, पर उसने उनकी बात सुनी तो पाया कि वे उसकी बुराई कर रहे थे। कोई कह रहा था कि, “मोहन घमण्डी है.” तो कोई कह रहा था कि, “सब जानते हैं वो अच्छा होने का दिखावा करता ह।” *मोहन ने इससे पहले सिर्फ अपनी प्रशंशा सुनी थी। पर इस घटना का उसके दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ा और अब वह जब भी कुछ लोगों को बाते करते देखता तो उसे लगता वे उसकी बुराई कर रहे हैं। यहाँ तक कि अगर कोई उसकी तारीफ़ करता तो भी उसे लगता कि उसका मजाक उड़ाया जा रहा है। धीरे-धीरे सभी ये महसूस करने लगे कि मोहन बदल गया है और उसकी पत्नी भी अपने पति के व्यवहार में आये बदलाव से दु:खी रहने लगी और एक दिन उसने पूछा, “आज-कल आप इतने परे...

🌿 *!! चुभन !!* 🌿

 पुरानी साड़ियों के बदले बर्तनों के लिए मोल भाव करती एक सम्पन्न घर की महिला ने अंततः दो साड़ियों के बदले एक टब पसंद किया।* *"नहीं दीदी ! बदले में तीन साड़ियों से कम तो नही लूँगा। " बर्तन वाले ने टब को वापस अपने हाथ में लेते हुए कहा।* *अरे भैया ! एक एक बार की पहनी हुई तो हैं.. ! बिल्कुल नये जैसी। एक टब के बदले में तो ये दो भी ज्यादा हैं , मैं तो फिर भी दे रही हूँ।*  *नहीं , तीन से कम में तो नहीं हो पायेगा ." वह फिर बोला।* *एक दूसरे को अपनी पसंद के सौदे पर मनाने की इस प्रक्रिया के दौरान गृह स्वामिनी को घर के खुले दरवाजे पर देखकर सहसा गली से गुजरती अर्द्ध विक्षिप्त महिला ने वहाँ आकर खाना माँगा।* *आदतन हिकारत से उठी महिला की नजरें उस महिला के कपडों पर गयी। अलग अलग कतरनों को गाँठ बाँध कर बनायी गयी उसकी साड़ी उसके युवा शरीर को ढँकने का असफल प्रयास कर रही थी।*  *एकबारगी उस महिला ने मुँह बिचकाया। पर सुबह सुबह का याचक है सोचकर अंदर से रात की बची रोटियाँ मँगवायी। उसे रोटी देकर पलटते हुए उसने बर्तन वाले से फिर कहा -* *तो भैय्या ! क्या सोचा ? दो साड़ियों में दे रहे हो या मैं वापस रख...

Time is Not the Same Forever

  Time is Not the Same Forever The saying "time is not the same forever" is a reminder that things change. Nothing in life stays the same, and that includes time. The passage of time is constant, but the way we experience time can change. When we are young, time seems to pass slowly. We have all had the experience of waiting for a birthday or a holiday to come around, and it can feel like time is dragging on forever. As we get older, time seems to pass more quickly. This is because we have more experiences to fill our lives, and we become more accustomed to the passage of time.

Practice makes a person perfect

Practice makes a person perfect  The proverb "practice makes a man perfect" is a timeless adage that has been passed down through the ages. It is a simple yet powerful statement that encapsulates the importance of repetition and hard work in achieving mastery of any skill. In the context of work, practice can be defined as the act of repeatedly performing a task or activity in order to improve one's performance. This can involve anything from practicing a presentation to practicing a new software program. There are many reasons why practice is so important in the workplace. First, it helps to build muscle memory. When we perform a task repeatedly, our brain begins to create neural pathways that make it easier for us to perform that task in the future. This is why, for example, a professional tennis player can hit a serve with incredible accuracy, even after thousands of repetitions. Second, practice helps to improve our skills. The more we practice, the better we become ...