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नेकी कर दरिया में डाल (Neki Kar Dariya Mein Daal)

  नेकी कर दरिया में डाल (Neki Kar Dariya Mein Daal) रानीपुर नाम के एक छोटे से गाँव में रहते थे रामू, एक ईमानदार और मेहनती लकड़हारा. वो जंगल से लकड़ी काट कर बेचता था और अपनी पत्नी सीता और बेटी गीता का गुजारा करता था. रामू गरीब जरूर था, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था. वो "नेकी कर दरिया में डाल" के सिद्धांत में विश्वास करता था. हर हफ्ते कमाई से थोड़े से पैसे बचाकर वो किसी जरूरतमंद की मदद कर देता. कभी भूखे को खाना खिला देता, कभी किसी मजदूर को मजदूरी दिलाने में मदद कर देता. रामू की इस नेकी की चर्चा पूरे गाँव में थी. गाँव के लोग रामू को आदर से देखते थे. एक दिन, जब रामू जंगल से लकड़ी काट कर लौट रहा था, तो उसे रास्ते में एक घायल चील गिरी हुई मिली. उसका पंख टूटा हुआ था और चील तड़प रही थी. रामू को उस पर दया आ गई. वो चील को उठाकर अपने घर ले गया. सीता ने चील का घाव साफ किया और पट्टी बांधी. रामू रोज जंगल से जड़ी-बूटी लाकर उसका इलाज करता. कुछ दिनों में चील ठीक हो गई. वो अब उड़ने के लिए तैयार थी. रामू उसे जंगल ले गया. चील रामू के कंधे पर बैठ गई और उसे एक तरफ देखने का इशारा किया. रामू ने देखा ...